देहरादून। उत्तराखंड में इस बार नौतपा का असर सामान्य वर्षों की तुलना में काफी कमजोर रहा। जहां आमतौर पर नौतपा के दौरान भीषण गर्मी और लू लोगों को परेशान करती है, वहीं इस बार शुरुआती कुछ दिनों की गर्मी के बाद मौसम ने करवट ले ली। प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी होने से तापमान में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई।
नौतपा की शुरुआत में देहरादून समेत मैदानी इलाकों में तेज धूप और गर्म हवाओं का असर देखने को मिला। 25 मई को राजधानी दून का अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया था। हालांकि कुछ ही दिनों बाद मौसम बदल गया और बादलों के साथ बारिश शुरू होने से तापमान में तेजी से गिरावट दर्ज की गई।
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, मई के अंतिम दिनों में देहरादून में सामान्य से कई गुना अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई। लगातार हो रही बारिश ने प्रदेशभर में गर्मी से राहत पहुंचाई है। मैदानी क्षेत्रों में मौसम सुहावना बना हुआ है, जबकि पर्वतीय इलाकों में ठंड का अहसास बढ़ गया है।
मौसम विभाग ने बुधवार के लिए भी कई जिलों में बारिश और तेज हवाओं का येलो अलर्ट जारी किया है। देहरादून, टिहरी, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ के कुछ हिस्सों में बिजली चमकने के साथ तेज आंधी चलने की संभावना जताई गई है। वहीं ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी के भी आसार हैं।
इस बीच मसूरी में मंगलवार दोपहर बाद हुई झमाझम बारिश ने मौसम को पूरी तरह बदल दिया। बारिश के बाद घना कोहरा छा गया और तापमान में गिरावट आने से ठंड बढ़ गई। अचानक बदले मौसम के कारण पर्यटकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई लोग बारिश से बचने के लिए होटलों और दुकानों में शरण लेते नजर आए। वहीं शहर की जल निकासी व्यवस्था भी सवालों के घेरे में आ गई, क्योंकि कई सड़कों पर पानी भर गया।
उधर, देहरादून की सहस्त्रधारा और रिस्पना नदियों का जलस्तर भी तेज बारिश के बाद बढ़ गया। सहस्त्रधारा क्षेत्र में नदी किनारे बनी कई अस्थायी झोपड़ियां और दुकानों का सामान बह गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि नदी के बहाव को व्यवस्थित करने और बाढ़ से बचाव के लिए प्रशासन को जल्द ठोस कदम उठाने चाहिए।
