देहरादून: उत्तराखंड में इस वर्ष की चारधाम यात्रा श्रद्धा और रिकॉर्डतोड़ भीड़ के नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है, लेकिन इसके साथ ही स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां भी प्रशासन के लिए बड़ी चिंता का विषय बन गई हैं। इस साल अब तक 40.03 लाख से अधिक श्रद्धालु चारों धामों के दर्शन कर चुके हैं, लेकिन दुर्भाग्यवश इस यात्रा के दौरान अब तक 204 यात्रियों की जान जा चुकी है।
स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, कुल मौतों में से 201 यात्रियों की मृत्यु हृदयघात (हार्ट अटैक), सांस लेने में तकलीफ और स्वास्थ्य से जुड़ी अन्य गंभीर जटिलताओं के कारण हुई है। जान गंवाने वाले श्रद्धालुओं में अधिकांश बुजुर्ग और पहले से ही किसी न किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित थे।
गौरतलब है कि इस वर्ष चारधाम यात्रा की शुरुआत 19 अप्रैल को गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ हुई थी। महज दो महीनों के भीतर ही 40 लाख से अधिक भक्तों का पहुंचना श्रद्धालुओं के भारी उत्साह को दर्शाता है। हालांकि, केदारनाथ और बदरीनाथ जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ऑक्सीजन की कमी, पैदल मार्गों की चढ़ाई और लगातार बदलते प्रतिकूल मौसम के कारण यात्रियों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। कई यात्री अपनी उम्र और बीमारियों को दरकिनार कर केवल आस्था के भरोसे यहां पहुंच रहे हैं।
बढ़ते स्वास्थ्य जोखिमों को देखते हुए प्रशासन भी अलर्ट पर है। ऋषिकेश स्थित ट्रांजिट कैंप में एक अस्थाई अस्पताल बनाया गया है, जहाँ यात्रा शुरू करने से पहले ही तीर्थयात्रियों की गहन स्वास्थ्य जांच की जा रही है। डॉक्टरों द्वारा यात्रियों को पहाड़ी क्षेत्रों में सावधानी बरतने और स्वास्थ्य संबंधी गाइडलाइंस का सख्ती से पालन करने की सलाह दी जा रही है।
