कोटद्वार में बाढ़ से कृषि भूमि पर संकट, नदी के चैनलाइजेशन की उठी मांग
कोटद्वार। कोटद्वार क्षेत्र में सुखरौ नदी का लगातार बदलता प्रवाह ग्रामीणों के लिए चिंता का कारण बन गया है। नदी में आई बाढ़ और तेज कटाव से निंम्बूचौड़ व खूनीबड़ गांव की कृषि भूमि, आबादी और बाढ़ सुरक्षा व्यवस्थाओं पर खतरा मंडरा रहा है। इसे देखते हुए स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से नदी का वैज्ञानिक तरीके से चैनलाइजेशन कराने और तटबंधों को मजबूत करने की मांग उठाई है।
स्थानीय निवासी उमेश चंद्र नौटियाल ने जिलाधिकारी पौड़ी को ज्ञापन सौंपकर बताया कि हर वर्ष मानसून के दौरान सुखरौ और ग्वालगढ़ नदियों में आने वाली बाढ़ से निंम्बूचौड़ और खूनीबड़ क्षेत्र की उपजाऊ कृषि भूमि का लगातार कटाव हो रहा है। नदी का रुख गांव की ओर बढ़ने से सिंचाई विभाग की बाढ़ सुरक्षा दीवार भी खतरे की जद में आ गई है, जिससे भविष्य में बड़े नुकसान की आशंका जताई जा रही है।
ज्ञापन में मांग की गई है कि सुखरौ नदी पुल के ऊपरी और निचले हिस्से में मशीनों की सहायता से नदी की धारा का वैज्ञानिक ढंग से चैनलाइजेशन कराया जाए। साथ ही खुदाई के दौरान निकलने वाली आरबीएम (रिवर बेड मैटेरियल) का उपयोग कटावग्रस्त क्षेत्रों को भरने में किया जाए, ताकि नदी के किनारों को मजबूत किया जा सके और कृषि भूमि को सुरक्षित रखा जा सके।
नौटियाल ने बताया कि कई दशक पहले सुखरौ नदी का प्रवाह वर्तमान स्थान से अलग था, लेकिन समय के साथ लगातार हो रहे कटाव के कारण नदी का दायरा काफी बढ़ गया है। उनका कहना है कि पुराने राजस्व अभिलेखों से इस तथ्य की पुष्टि की जा सकती है।
उन्होंने सुझाव दिया कि चैनलाइजेशन का कार्य निर्धारित खसरा क्षेत्रों से पर्याप्त दूरी पर किया जाए, जिससे भविष्य में खेतों को नुकसान न पहुंचे। इसके अलावा नदी के दाहिने किनारे पर आरसीसी बाढ़ सुरक्षा दीवार और मजबूत तटबंध का निर्माण भी कराया जाए, ताकि ग्रामीण आबादी, कृषि भूमि और सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मुद्दे को लेकर पहले भी कई बार प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया गया, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं होने से हर साल भूमि कटाव की समस्या गंभीर होती जा रही है। उन्होंने प्रशासन से मानसून के दौरान स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जल्द स्थलीय निरीक्षण कर आवश्यक कदम उठाने की मांग की है। ज्ञापन की प्रतिलिपि प्रदेश और केंद्र सरकार के संबंधित विभागों व अधिकारियों को भी भेजी गई है।
