नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच पिछले 107 दिनों से जारी युद्ध के खत्म होने की घोषणा ने वैश्विक और भारतीय बाजारों में नई जान फूंक दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा शांति समझौते के एलान और रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) के दोबारा खुलने की खबर से पूरी दुनिया के निवेशकों में उत्साह की लहर दौड़ गई है।
इस ऐतिहासिक शांति समझौते का सबसे सकारात्मक असर भारतीय शेयर बाजार और भारतीय मुद्रा पर देखने को मिला है। सोमवार को शुरुआती कारोबार के दौरान ही अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 53 पैसे मजबूत होकर खुला।
शेयर बाजार का हाल: रिकॉर्ड तेजी के साथ खुले सेंसेक्स और निफ्टी
भारतीय शेयर बाजार में आज चौतरफा खरीदारी देखने को मिली:
सेंसेक्स (BSE): बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स 1080 अंकों की भारी उछाल के साथ हरे निशान पर खुला।
निफ्टी (NSE): नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 330 अंकों की शानदार तेजी के साथ खुला।
टॉप गेनर्स (मुनाफा कमाने वाले शेयर्स):
सेंसेक्स: इंडिगो, इटरनल, बजाज फाइनेंस और एशियन पेंट्स के शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी दर्ज की गई।
निफ्टी: श्रीराम फाइनेंस, इंडिगो, ईटरनल, बजाज फाइनेंस और टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल (TMPV) टॉप-5 हरे निशान वाले शेयरों में शामिल रहे।
एशियाई बाजारों में जश्न: जापान और कोरिया में 4% से ज्यादा का उछाल
शांति की इस खबर से केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरा एशिया-प्रशांत क्षेत्र झूम उठा है:
जापान: निक्केई (Nikkei) सूचकांक 4 फीसदी से अधिक की बढ़त के साथ अपने इंट्राडे रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गया।
दक्षिण कोरिया: कोस्पी (Kospi) सूचकांक में 4.3 प्रतिशत की जोरदार वृद्धि दर्ज की गई।
ऑस्ट्रेलिया: एएसएक्स200 (ASX200) 125 अंक बढ़कर 8928 पर कारोबार करता दिखा, जहां 11 में से 7 सेक्टरों में भारी तेजी रही।
कच्चे तेल में बड़ी गिरावट, पेट्रोल-डीजल सस्ता होने की उम्मीद
युद्ध थमने का सबसे बड़ा फायदा कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के रूप में सामने आया है:
ब्रेंट क्रूड (अंतरराष्ट्रीय मानक): $3.45 की गिरावट के साथ $83.88 प्रति बैरल पर आ गया।
अमेरिकी बेंचमार्क क्रूड: $3.95 टूटकर $80.93 प्रति बैरल पर पहुंच गया।
विशेषज्ञों की राय: कच्चे तेल की कीमतों में $3 से ज्यादा की इस गिरावट के बाद अब घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल के दाम कम होने की उम्मीद जगी है। हालांकि, बाजार विश्लेषकों का कहना है कि युद्ध की वजह से सप्लाई चेन में जो रुकावटें आई थीं, उन्हें पूरी तरह ठीक होने और तेल बाजार को स्थिर होने में अभी कुछ महीनों का समय लग सकता है।
