नई दिल्ली: भारत में सोना केवल आभूषण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक प्रमुख और सुरक्षित निवेश माध्यम माना जाता है। हालांकि, निवेश के उद्देश्य से सोने के गहने खरीदना हर बार फायदे का सौदा साबित नहीं होता। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, ज्वैलरी खरीदते समय लगने वाले मेकिंग चार्ज (औसतन 15%) और 3% जीएसटी जैसी अतिरिक्त लागतें शॉर्ट-टर्म ट्रेडिंग में मुनाफे को काफी हद तक कम या खत्म कर देती हैं।
यदि कोई व्यक्ति निवेश के लिए गहने खरीदता है और कम समय में उसे बेचता है, तो मेकिंग चार्ज और टैक्स की रकम वापस न मिलने से उसे नुकसान उठाना पड़ सकता है। हालांकि, 5 साल या उससे अधिक की लंबी अवधि में सोने के दामों में बढ़ोतरी से इस घाटे की भरपाई होकर शुद्ध मुनाफा मिल सकता है। यही वजह है कि वित्तीय सलाहकार निवेश के लिहाज से भौतिक गहनों के बजाय गोल्ड कॉइन, बार या डिजिटल गोल्ड में निवेश को अधिक सुरक्षित और फायदेमंद मानते हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार और घरेलू संकेतों के बीच वायदा बाजार में सोने के भाव में उतार-चढ़ाव जारी है। 10 अगस्त को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 10 ग्राम सोने का भाव ₹1,52,589 के स्तर पर कारोबार करता देखा गया, जबकि दिन का उच्चतम स्तर ₹1,52,999 तक पहुंचा। वहीं इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार 24 कैरेट सोने की कीमत ₹1,51,061 प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई।
