नई दिल्ली- बुधवार को भारतीय शेयर बाजार में हुई भारी बिकवाली के बाद, गुरुवार के कारोबारी सत्र में शानदार रिकवरी देखने को मिली है। कमजोर वैश्विक संकेतों के चलते पिछले सत्र में निवेशकों के लाखों करोड़ रुपये स्वाहा होने के बाद, आज बाजार ने दमदार वापसी की। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांकों में आधा प्रतिशत से अधिक की मजबूती देखी गई, जिससे निफ्टी ने एक बार फिर 24,000 के बेहद महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर को सफलतापूर्वक पार कर लिया है। हालांकि, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के दबाव में रुपया शुरुआती कारोबार में डॉलर के मुकाबले 4 पैसे गिरकर 95.52 के स्तर पर आ गया।
गुरुवार सुबह 09:35 बजे के कारोबारी सत्र में घरेलू बाजार के दोनों प्रमुख बेंचमार्क सूचकांकों में बढ़त का माहौल रहा। बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का संवेदनशील सूचकांक सेंसेक्स 492.38 अंक (0.64%) की तेजी के साथ 76,995.98 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 50 सूचकांक भी 138.11 अंक (0.58%) की छलांग लगाकर 24,020.15 के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। इस शुरुआती रिकवरी ने बीते सत्र के भारी मानसिक दबाव से जूझ रहे निवेशकों को बड़ी राहत दी है।
बाजार में शुरुआती बढ़त को मुख्य रूप से चुनिंदा डिफेंसिव और कंजम्पशन सेक्टरों से समर्थन मिला। इस तेजी का नेतृत्व मुख्य रूप से कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और फार्मा सेक्टर्स के शेयरों ने किया। तेजी को सन फार्मा, भारती एयरटेल, टाइटन, रिलायंस इंडस्ट्रीज और एचडीएफसी बैंक जैसे मजबूत ब्लू-चिप शेयरों का सहारा मिला। हालांकि, सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) सेक्टर की दिग्गज कंपनियां जैसे इंफोसिस, टीसीएस, एचसीएल टेक और टेक महिंद्रा इस रिकवरी के दौरान भी पिछड़ती नजर आईं।
बाजार में आई इस बड़ी गिरावट के बीच सबसे चौंकाने वाला और महत्वपूर्ण आंकड़ा विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) का रहा। बुधवार को जब बाजार में हाहाकार मचा था, तब भी विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार पर भरोसा जताते हुए 1,962.80 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध खरीदारी की।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी के विजयकुमार के अनुसार, वैश्विक तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड का 78.83 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर होना भारत के लिए कोई चिंता की बात नहीं है और इससे देश के भुगतान संतुलन (बीओपी) पर कोई संकट नहीं आएगा। भारतीय बाजार के लिए वास्तविक संकट तभी पैदा होगा, जब तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की नौबत आ जाए और कच्चा तेल $100 प्रति बैरल के पार निकल जाए।
भले ही बाजार में रिकवरी देखी जा रही है, लेकिन तकनीकी विश्लेषक अभी भी पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं। मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, बुधवार को हुई भारी बिकवाली के दौरान निफ्टी ने अपने सबसे महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन (24,000-24,150) के दायरे को तोड़ दिया था और सूचकांक अपने सभी प्रमुख मूविंग एवरेज से भी नीचे खिसक गया है। विश्लेषकों का मानना है कि इस गिरावट ने निफ्टी के शॉर्ट-टर्म तकनीकी आउटलुक को कमजोर कर दिया है, जिसके चलते निवेशकों को मौजूदा स्तरों पर पूरी सतर्कता बरतनी चाहिए।
