मनोरंजन डेस्क। गुल्लक… यह सिर्फ मिट्टी का एक बर्तन नहीं होता, बल्कि एक मध्यमवर्गीय (Middle Class) परिवार की उन नन्हीं ख्वाहिशों की तिजोरी होती है, जिन्हें पूरा करने की कोई जल्दी नहीं होती। इसी बेहद खूबसूरत और भावुक विषय को समेटकर साल 2019 में 27 जून के दिन दर्शकों की जिंदगी का हिस्सा बनी थी वेब सीरीज ‘गुल्लक’। जमील खान, गीतांजलि कुलकर्णी, वैभव राज गुप्ता, हर्ष मायर और सुनीता राजवार जैसे उम्दा कलाकारों से सजी इस सीरीज के सफर को कई साल बीत चुके हैं, लेकिन इसकी प्रासंगिकता आज भी वैसी ही बनी हुई है।
आइए जानते हैं कि आखिर क्यों यह सीरीज और मिश्रा परिवार का हर एक किरदार आज भी हर भारतीय को अपना सा महसूस कराता है:
1. संतोष मिश्रा: हर घर के ‘जुगाड़ू’ और प्यारे पापा
सीरीज में जमील खान द्वारा निभाया गया ‘पापा’ यानी संतोष मिश्रा का किरदार हर मिडिल क्लास पिता की हुबहू परछाई है। रविवार के दिन हाथ में टूलबॉक्स लेकर बैठना, महीनों से आवाज कर रहे पंखे या दरवाजे की कुंडी को ठीक करने की कोशिश करना और शाम को काम पूरा होने की एक मासूम सी खुशी चेहरे पर समेट लेना—यह एक ऐसा नजारा है जिसे हर युवा ने अपने घर में देखा है।
2. शांति मिश्रा: कम बजट में खुशियां बटोरती ‘मम्मी’
गीतांजलि कुलकर्णी ने ‘शांति मिश्रा’ के रूप में एक ऐसी मां का किरदार जिया है जो कम बजट में भी घर को सुचारू रूप से चलाती है। अचानक मेहमान आने पर अलमारी से खास कप निकालना, या सब्जी कम होने पर प्यार से ‘तहरी’ बना देना—यह दिखाता है कि मध्यवर्गीय घरों में स्वाद सिर्फ मसालों से नहीं, बल्कि मां की नीयत से आता है।
3. ‘पानी आ गया!’ और रिमोट की वो जंग
मिश्रा परिवार के जरिए सीरीज ने उन जमीनी हकीकतों को छुआ है, जिससे हर कोई जुड़ा है। सुबह तय समय पर पानी आने की चिंता, बाल्टियों और ड्रमों का सज जाना और पूरे मोहल्ले में मचने वाली हलचल को सीरीज में बेहद खूबसूरती से दिखाया गया है। इसके साथ ही, बड़े होने के बावजूद टीवी के रिमोट के लिए अनु और अमन का आपस में लड़ना-झगड़ना हर भाई-बहन की कहानी बयां करता है।
4. बिट्टू की मम्मी: मोहल्ले का ‘लाइव न्यूज चैनल’
सुनीता राजवार द्वारा निभाया गया ‘बिट्टू की मम्मी’ का किरदार आज के दौर में भले ही प्राइवेसी में दखल लगे, लेकिन वे हमारे समाज का एक अनिवार्य हिस्सा हैं। किसके घर नया फ्रिज आया या किसके घर सुबह बर्तन जोर से बजे, इसकी पूरी खबर रखने वाली ‘बिट्टू की मम्मी’ हर मोहल्ले की कहानी हैं।
समय के साथ मिश्रा परिवार के घर में भी वाई-फाई आ जाता है और बेटों की दिलचस्पी सिक्कों की खनक से ज्यादा इंटरनेट के पासवर्ड में होने लगती है। ड्रॉइंग रूम की मेज पर रखी उस गुल्लक की यह ‘जलन’ दर्शकों के दिलों को छू जाती है। यह सीरीज हमें याद दिलाती है कि भले ही हम नई चीजों को अपना लें, लेकिन पुरानी यादों और अपनों का महत्व कभी कम नहीं होता।
